शुक्रवार, 9 सितंबर 2016

पार्थवी के स्कूल मे तीसरा रक्तदान शिविर 3rd Blood Donation Camp in Parthvi's School

पार्थवी के स्कूल मे तीसरा रक्तदान शिविर  3rd Blood Donation Camp in Parthvi's School

पार्थवी के स्कूल मे तीसरा रक्तदान शिविर लगा था ....बच्चो मे उत्साह था कि मेरे पापा मेरी मम्मी रक्तदान करेंगे .......मैं भी बेटी के आग्रह को ठुकरा नहीं सका और कर ही डाला रक्तदान ........शायद किसी जरूरतमंद के काम आ जाए। यह आयोजन मुकंदलाल पब्लिक स्कूल में सेठ जयप्रकाश के जन्मदिवस पर हुआ 
बच्चों के अभिभावकों और विद्यालय के पूर्व छात्रों ने इस मेले में भाग लेकर रक्तदान किया। रक्तदान शिविर सुबह नो बजे से शुरू होकर शाम तक चला। मुंकंद लाल शिक्षण संस्थानों के चेयरमैन अशोक कुमार, सेठानी श्यामाजी और उनके परिवार के सदस्यों ने दीप प्रज्वलित किया। विद्यालय के प्रबंधक डॉ. रमेश कुमार और प्रधानाचार्य ने माल्यार्पण किया। 
जिसमें बच्चों द्वारा रक्तदान पर स्वरचित कविताएं काफी सराही गई। इसके अतिरिक्त शास्त्रीय नृत्य, समूह गान, भांगड़ा, बच्चों सेठ जयप्रकाश के जीवन और कृतित्व पर प्रकाश, रक्तदान पर लघु नाटिका, गिद्दा, कविता तथा एरोबिक्स आदि का प्रस्तुतीकरण मुख्य रहा।
मुकंद लाल पब्लिक स्कूल सरोजिनी कालोनी यमुनानगर स्कूल मे लगे इस रक्तदान मेले को देख कर सच मे ऐसा लगा कि ये मेला ही तो है जहां देशभक्ति के गीत, बैशाखी के मेले जैसे गिद्दे-भंगडे, हैल्थ मेले जैसे योगा-एरोबिक्स, कलात्मक कलाकृतियों की प्रदर्शनियां, जोश भर देने वाले भाषण, मेहमानों की आवोभगत ये सब मेला ही तो था जहां अभिभावक और स्कूल एलुमिनी रक्तदान करके बच्चो को सन्देश दे रहे थे कि किसी की जिंदगी बचाने मे अपना योगदान देना सीखो
इस रक्तदान मेले मे अभिभावकों और पूर्व छात्रों ने रक्तदान किया 
सरोजनी कालोनी स्थित मुकंदलाल पब्लिक स्कूल में सेठ जयप्रकाश का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर स्कूल में प्रथम रक्तदान शिविर लगाया गया जिसमे 166 यूनिट रक्त एकत्र किया गया।
स्कूल की प्रधानाचार्य शशि बाटला ने विद्यालय में स्वैच्छिक रक्तदान के लिए बच्चों को प्रेरित किया। 

खून की तो फितरत ही है बहना....
नफरत से गलियों मे बहता है.......
लापरवाही से सड़को पर बहता है .......
देशप्रेम से सीमाओं पर बहता है  .......
दान देने से गैर की रगो मे बहता है ये खून ........
इसकी फितरत ही बहने की है ........
बहाओ जरूर!  मगर वहां,  जहां है इसकी जरूरत।
क्यों जरूरी है रक्तदान ?
                             Darshan Lal Baweja F/O Parthvi Class 4-c                           
रक्त का शरीर से निकाल कर जरूरतमंद व्यक्ति को देना रक्तदान कहलाता है बशर्ते इसके बदले कोई धन पुरस्कार आदि ना लिया जाए या  रक्तदान तब होता है जब एक स्वस्थ व्यक्ति स्वेच्छा से अपना रक्त देता है रक्तदान सही मायनों मे जीवनदान ही है। हमारे द्वारा किया गया रक्त का दान कई लोगो की जान बचाता है। इस बात का अहसास हमें तब होता है जब हमारा कोई अपना खून के लिए जिंदगी और मौत के बीच जूझता है। उस वक्त हम नींद से जागते हैं और उसे बचाने के लिए खून के इंतजाम की जद्दोजहद करते हैं। 
देश भर में रक्तदान हेतु नाकोरेडक्रासपंजीकृत ब्लडबैंकसेना हस्पताल  जैसी कई संस्थाएँ लोगों में रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास कर रही है परंतु इनके प्रयास तभी सार्थक होंगेजब हम स्वयं रक्तदान करने के लिए आगे आएँगे और अपने मित्रों व रिश्तेदारों को भी इस हेतु आगे आने के लिए प्रेरित करेंगे।
जीवन बचाने के लिए खून चढाने की जरूरत पडती है। दुर्घटना रक्‍तस्‍त्राव प्रसवकाल और ऑपरेशन आदि अवसरों में शामिल है,जिनके कारण अत्‍यधिक खून बह सकता है और इस अवसर पर उन लोगों को खून की आवश्‍यकता पडती है। थेलेसिमिया ल्‍यूकिमिया हीमोफिलिया जैसे अनेंक रोगों से पीडित व्‍यक्तियों के शरीर को भी बार-बार रक्‍त की आवश्‍यकता रहती है अन्‍यथा उनका जीवन खतरे में रहता है। जिसके कारण उनको खून चढाना अनिवार्य हो जाता है
                      
स्वैच्छिक रक्तदान में केवल 450 मिलीलीटर रक्त निकाला जाता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के मुताबिक आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि 450 मिली खून तीन जिन्दगियों को बचा सकता है। सही समय पर रक्त न मिलने की वजह से प्रति वर्ष देश में बहुत सारे जरूरतमंदों की मौत हो जाती है। सड़क दुर्घटनागर्भावस्‍था से गुजर रही महिलाएंबड़ी सर्ज़री वाले मरीजकैंसर के शिकार व्यक्तियों व थैलीसीमिया के शिकार बच्चों को सुरक्षित रक्त की बेहद आवश्यकता होती है। 

रक्त से रक्‍त अवयवों को अलग कर जरूरतमन्द मरीजों को चढ़ाने से रक्‍त की बचत होती हैजो इस देश के लिए आवश्‍यक है । एक यूनिट ब्लड से कई अवयव तैयार किए जा सकते हैंजैसे- लाल रक्तकणिकाएंप्लेटलेट्सप्लाज्मा आदि। किसी मरीज को केवल वही अवयव चढ़ाया जाता है जिसकी उसे जरूरत होती है।
                             रक्तदान के फायदे 
बीएल कपूर मेमोरियल अस्पताल के ट्रांसफ़्यूजन मेडिसीन विभाग की डॉ. रसिका सेतिया के अनुसार स्‍वैच्छिक रक्तदान से फायदे ही फायदे हैं । उनके अनुसार रक्तदान करके न सिर्फ किसी की ज़ि़न्दगी बचाने जैसी अनमोल खुशी मिलती है बल्कि इससे हमारी सेहत को भी लाभ पहुंचता है।
* दिल के रोगों की संभावना कम होती है- यह पाया गया है की खून में लौह तत्व का स्तर बढ़ने पर हृदय रोग की संभावना बढ़ जाती है। नियमित तौर पर रक्तदान करने से फालतू लौह तत्व शरीर से बाहर (खासकर पुरुशों के मामले में) चला जाता है। इस प्रकार हृदयाघात का जोखिम एक तिहाई तक कम हो जाता है।
नई लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन बढ़ता है- रक्तदान करने वाले व्यक्ति के शरीर से खून निकल जाने पर लाल रक्त कोशिकाओं में कमी आ जाती है। इनकी पुन: पूर्ति के लिए हमारी मज्जा तुरन्त नई कोशिकाओं के उत्पादन में लग जाती है और इस तरह हमारा खून स्वच्छ व नया हो जाता है।
* कैलोरी घटती है- नियमित तौर पर रक्तदान करके आप फिट रह सकते हैं। 450 मिली रक्तदान करने से आप अपने शरीर की 650 कैलोरी कम कर सकते हैं।
* प्राथमिक रक्त परीक्षण हो जाता है- इन सब फायदों के साथ रक्तदाता के खून का एक छोटा सा परीक्षण (रक्तदान के पूर्व व पश्चात्) भी हो जाता है। इसमें शामिल होते हैं- ऐचआईवीऐचबी स्तर की जांचरक्तचापशरीर का वजन आदि।
रक्तदान से यूरिक अम्ल और केलस्ट्रोल की मात्रा भी नियंत्रित रहती है 
LOWER IRON LEVELS, REDUCE THE CHANCE OF HEART DISEASES, ENHANCE THE PRODUCTION OF NEW RED BLOOD CELLS, REPLENISH BLOOD HELPS IN FIGHTING HEMOCHROMITOSIS, BURNS CALORIES, BASIC BLOOD TEST IS DONE & REDUCE CANCER RISK
कौन कौन कर सकता है रक्तदान
*जिसकी आयु 18 से 65 वर्ष के बीच हो।
*जिसका वजन (100 पौंड) 48 किलों से अधिक हो।
*जो क्षय रोगरतिरोगपीलियामलेरियामधुमेंहएड्स आदि बीमारियों से पीडित नहीं हो।
*जिसने पिछले तीन माह से रक्‍तदान नहीं किया हो।
*रक्‍तदाता ने शराब अथवा कोई नशीलीदवा न ली हो।
*गर्भावस्‍था तथा पूर्णावधि के प्रसव के पश्‍चात शिशु को दूध पिलाने की 6 माह की     अवधि में किसी स्‍त्री से रक्‍तदान स्‍वीकार नहीं किया जाता है।

          आओ प्रतिज्ञा करें कि हम नियमित रक्तदाता बनेंगे
झलकियां


शनिवार, 4 जून 2016

पार्थवी के स्कूल में समर कैम्प Summer Camp at Mukand Lal Public school Yamuna Nagar

पार्थवी के स्कूल में समर कैम्प Summer Camp at Mukand Lal Public school Yamuna Nagar 2016
मुख्य अतिथि व प्रधानाचार्या प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए 
पार्थवी के स्कूल मुकन्द लाल पब्लिक स्कूल सरोजिनी कालोनी यमुनानगर में समर कैम्प (ग्रीष्मकालीन शिविर) का समापन हुआ, इस समापन समारोह के मुख्य अथिति मुकंद लाल संस्थाओं के प्रबंधक डाक्टर रमेश कुमार थे 
समापन समारोह का दृश्य 
कईं दिनों से चल रहे इस समर कैम्प में जिले व बाहर के 19 विद्यालयों के 394 विद्यार्थियों ने विभिन्न समूहों में भाग लिया। पार्थवी इस बार ग्रीष्मकालीन शिविर में भाग नहीं ले सकी परन्तु समापन समारोह में भाग लेकर वह प्रसन्न हुई। जिले के बच्चे इस समर कैम्प का सालभर इन्तजार करते हैं। 
आओ जाने कैसा होता है पार्थवी के स्कूल का समर कैम्प (ग्रीष्मकालीन शिविर)     
पार्थवी प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए 
इस विद्यालय के समर कैम्प की काफी धूम रहती है और यहाँ विभिन्न गतिविधियों के विशेषज्ञ आमंत्रित किये जाते हैं जो कैम्पर्स को विभिन कलाओं में परांगत करते हैं और इन कलाओं का प्रदर्शन कैम्प के समापन दिवस पर अभिभावकों और मेहमानों के समक्ष करते हैं। समर कैम्प वास्तव में ज्ञानवर्धक और भीड़ से दूर अपने सहपाठियों, प्रशिक्षको और अध्यापको के साथ तालमेल स्थापित करने की कला का भी विकास करते हैं  
कैम्पर्स ने बनाए 
इस वर्ष मुझे इस कैम्प का समापन उत्सव में शरीक होने का अवसर मिला तो मैंने पाया की वास्तव में कुछ ही दिनों में बच्चों ने इस कैम्प के माध्यम से बहुत कुछ सीखा हैं और सबसे बड़ी बात कि इन दिनों बस उन्हें सीखना ही था आनन्दित होना था न की पढ़ाई लिखाई की कोई चिंता करनी थी।
कैम्पर्स ने बनाए
कैम्प में बच्चे क्लेमोडलिंग, कोरियोग्राफी, नाटक मंचन, नृत्य, गायन, वाद्ययंत्र बजाना, आत्मरक्षा, योगा, एरोबिक्स, बेस्ट आउट आफ दा वेस्ट, पाककला, कारपेंटरी क्राफ्ट, ब्रेवरीज एंड मोकटेल, पेपरक्राफ्ट, ट्रेकिंग आदि बहुत सी कलाओं में परांगत हुए।
समर कैम्प का बच्चों के लिए महत्व  
कैम्पर्स ने बनाए तरह तरह के क्राफ्ट 
कुछ देशों में (आमतौर पर) गर्मियों के महीनों में बच्चों और किशोर-किशोरियों के लिए विशेष निगरानी के अंतर्गत आयोजित किये जाने वाला यह एक कार्यक्रम होता है। समर कैम्प में शामिल होने वालो को कैम्पर्स के नाम से जाना जाता है। छुट्टियों का यह महीना बच्चों के लिए विशेष मायने रखता है। 
रंगा-रंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनन्द लेते हुए पार्थवी  
किताबों कापियों के बोझ से थके कंधे कुछ दिनों के लिए मुक्ति की साँस लेते हैं। अब न उन को सुबह उठने की हाय तौबा और न ही स्कूल जाने की समयबद्ध पाबन्दी होती है। परन्तु दूसरी और उनके माता-पिता ये सोच कर परेशान होते हैं कि इन पूरी छुटि्टयाँ इन बच्चों को कैसे सम्भाला जाय। आजकल बालक विभिन्न प्रकार के कम्प्युटर प्रोग्रामविडियो गेम्सइलेक्ट्रॉनिक मीडिया व आभासी दुनिया के मित्रों की बढ़ती लोकप्रियता के कारण बालक घर की चार दीवारों में बंध गया है ऐसे में उसे कुछ नया कराने के उद्देश्य से उन्हें आकर्षित करके इन बाउन्ड्रीज से बाहर समर कैम्पों के माध्यम से ही निकाला जा सकता हैपिछली पीढ़ियों की तुलना में आज बच्चों को घर के अंदर ही व्यस्त रखना काफी आसान हो गया है वहां उसे ज्ञानअर्जन तो हो सकता है परन्तु वहां उसमे व्यवहारिकता और समाजिकता का विकास हो पाना सम्भव नहीं है
रंगा-रंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मन मोहा   
 ये कैम्प आपसी तालमेल और सहयोग की भावना विकसित करने का सशक्त माध्यम होते है इन कैम्पों का मुख्य उद्देश्य शैक्षिक व सांस्कृतिक विकास होता है। समर कैम्प के माहौल में बच्चों को एक सुरक्षित व योग्य प्रशिक्षको की निगाहबानी में जोखिम उठाने का अवसर भी मिलता है जो की घर की चारदीवारी में संभव नहीं होता। ये ही वो पूर्वनियोजित कार्यक्रम है जिसे समर कैम्प (ग्रीष्मकालीन शिविर) के नाम से जाना जाता है। यहाँ बच्चों को उनकी पसन्द
Low or Zero Cost Science Experiments Demonstration
उनकी हाँबी के अनुसार काम दिया जाता है और उन्हें करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है । कई तरह के कार्यक्रम के द्वारा उनके मानसिकशारीरिक और बौद्धिक चेतना का विकास किया जाता है। 
इस समर कैम्प में बच्चों के पास कई पसन्द के चयन होते हैं जैसे ट्रैकिंगहाइकिंगजंगल यात्रापर्वतारोहण आदि जिसमें अपनी रुचि के अनुसार बच्चे भाग ले सकते हैं। समर कैम्प में बच्चों में मिलजुल कर रहने की प्रवृत्तिआपसी सदभावसहयोग और भाईचारे की भावना का विकास होता है। 

समर कैम्प में भौतिक सुविधाओं की कमी हो सकती हैफिर भी वहाँ बच्चों को वह मिलता है जो उन्हें सजे-सजाए घर में नहीं मिलता। आजकल एकल परिवार का जमाना हैजिसकी वजह से बच्चों में समाजिकता और रिश्तेदारियों के प्रेम का अस्तित्व सिमटता जा रहा है। 
प्रधानाचार्या श्रीमती शशी बठला ने संबोधित किया 
विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती शशी बठला ने अपने संबोधन में कहा कि विद्यालय में योग्य फेकल्टी मेम्बर्स व कुशल प्रशिक्षण विशेषज्ञों के आपसी तालमेल से एक बेहतरीन ज्ञानवर्धक ग्रीष्मकालीन शिविर का आयोजन सम्पन्न हुआ जिसके लिए सभी आयोजक/प्रबंधक बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने बच्चो और अभिभावकों का दिल जीत लिया। अभिभावकों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ये बहुत ख़ुशी की बात है कि इस कैम्प के माध्यम से अभिभावक मुकंद लाल संस्थाओं में अपना विश्वास व्यक्त करते हैं इसके लिए उन्होंने अभिभावकों का तहेदिल से धन्यवाद किया।
आयोजित समर कैम्प (ग्रीष्मकालीन शिविर) उक्त सभी मायनों पर खरा उतरता है मेरा (दर्शन बवेजा) का बहुत मन करता था कि मैं भी किसी गतिविधि या प्रशिक्षण के विशेषज्ञ के रूप में इस आयोजन का हिस्सा बन कर अपने बचपन को फिर से जी सकूं इस बार मैंने जब अपनी यह इच्छा प्रिंसिपल महोदया के समक्ष रखी तो उन्होंने मुझे  
विज्ञान गतिविधि करता बालक 
कैम्प्रस के समक्ष कम या शून्य लागत (
Low or Zero Cost Science Experiments Demonstration) के विज्ञान प्रयोगों का प्रदर्शन और बच्चों में कोई भी एक शौंक विकसित (Hobby Devlopment) करने बारे व्याख्यान की अनुमति प्रदान की
200 के करीब बच्चों को लगभग दो घंटे तक विज्ञान के विभिन्न प्रयोगों और कोइन्स व पोस्टल स्टैम्प्स कलेक्शन का प्रदर्शन किया गया। 
इन विज्ञान गतिविधियों और प्रयोगों के माध्यम से बच्चे स्कूल के बाद अपने घर पर भी पाठ्यक्रम के विज्ञान प्रयोगों को दोहरा कर सकते हैं, मैंने बच्चों को प्रकाश के
Hobby of coins and postage stamps collection
अपवर्तन
, परावर्तन, विक्षेपण, बर्नौली, आर्कमडीज, न्यूटन, पास्कल, जडत्व, वायु दबाव, अपकेन्द्रण बल, दृष्टि भ्रम, इलेक्ट्रोनिक्स से परिचय, दिक् सूचक, घर्षण बल, अम्लीयता व क्षारीयता को जांचनादृष्टिभ्रम, विद्युत परिपथ, शुष्क सेल, विद्युत् मोटर,
 पृष्ठतनाव सम्बंधित विज्ञान गतिविधियों को प्रदर्शित किया। 

इन विज्ञान गतिविधियों को मैंने कम लागत के साथ विकसित किया है जिनको बनाने के लिए सामान घर व आसपास से ही मिल जाता है। मैंने खुद की coins and Notes Collection व डाक टिकटों के संग्रह का भी प्रदर्शन किया जिसमे बच्चों ने विशेष रूचि प्रकट की। 
कुल मिला कर यह समर कैम्प बच्चों के लिए यादगार बन गया .....
दर्शन  लाल बवेजा (अभिभावक)