रविवार, 18 अक्तूबर 2015

पार्थवी के स्कूल में पेंटिंग Painting Competition WSW-15 in school

भारत के अन्तरिक्ष में बढ़ते क़दमों से पूरी दुनिया आश्चर्यचकित – शशि बाठला
विश्व अंतरिक्ष सप्ताह के छठे दिन आज आज स्थानीय मुकुंद लाल पब्लिक स्कूल सरोजिनी कालोनी मे अंतरिक्ष में खोज और नयी तकनीक विषयों पर एक भाषण प्रतियोगिता और पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता का शुभारम्भ विद्यालय की प्रधानाचार्या शशि बाठला ने किया और अपने संबोधन में बच्चों को बताया कि भारत के अन्तरिक्ष में बढ़ते क़दमों से पूरी दुनिया आश्चर्यचकित है। भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो नित नए रिकार्ड कायम कर रहा है जिस से विश्व के लिये भारत एक बड़ा अन्तरिक्ष बाज़ार बन रहा है। 
बहुत से देश अपने उपग्रह अब भारत से प्रक्षेपित करवा रहें है जो कि हम सब के लिए गर्व का विषय है। हमारे लिए और भी गर्व की बात है कि नासा जैसे विश्वविख्यात अन्तरिक्ष प्रतिष्ठान में भी बहुत से अन्तरिक्ष वैज्ञानिक भारतीय या भारतीय मूल के ही हैं। एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने  देश के पहले एस्ट्रोसैट’ उपग्रह पीएसएलवी-सी30 का प्रक्षेपण कर इतिहास रच दिया। 
यह भारत का पहला एस्ट्रोसैट उपग्रह है और इससे ब्रहांड को समझने और सुदूरवर्ती खगोलीय पिंडों के अध्ययन करने में में मदद मिलेगी। 513 किलोग्राम का एस्ट्रोसैट उपग्रह को 6 अन्य विदेशी उपग्रहों के साथ प्रक्षेपित किया गयाजिससे दुनिया के अन्तरिक्ष तकनीक से लैस चंद नामी देशों में भारत का नाम भी आ गया। 
इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा भी चंद्रयानमंगल मिशनपरग्रहीय जीवन की खोजअन्तरिक्ष कचरा और निवारणमौसम और जलवायु नियन्त्रण पर अन्तरिक्षीय नजरमिशन बृहस्पतिएलियन से दोस्तीमंगल पर जल और जीवन की तलाश विषयों पर चर्चा की गयी।
बालकों ने खगोलीय घटनाओं सूर्य व चन्द्र ग्रहण आदि के अवलोकन का सामजिकधार्मिक दृष्टि से प्रचलित अंधविश्वासों पर मंथन और निवारण विषयों पर अपने विचारों और समझ को आपस में सांझा किया। इस अवसर पर बच्चों ने जिला समन्वयक दर्शनलाल से अन्तरिक्ष विज्ञान और विज्ञान पत्रकारिता जैसे क्षेत्र में कैरियर बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की।    
परिणाम

इन प्रतियोगिताओं में शालिनी भट्टमानवी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। आकांक्षा राणा व अमन सैनी ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। पारस बतरा व यश कुमार ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।। इस कार्यक्रम मे किरण मनोचापूजा कालरा व ममता वर्मा सचदेवासाक्षी सिक्का व जसप्रीत कौर अध्यापिकाओं का योगदान सराहनीय रहा।

अखबारों में 

शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2015

पार्थवी के स्कूल में हुआ साइंस ड्रामा Science Drama competition at Parthvi's School

राष्ट्रीय विज्ञान नाटक प्रतियोगिता का हुआ आयोजन
मुकंद लाल पब्लिक स्कूल के नाटक ‘अथ शापित कथा’ का चयन राज्य स्तर के लिए हुआ  
आज स्थानीय मुकुंद लाल पब्लिक स्कूल सरोजिनी कालोनी मे राष्ट्रीय विज्ञान नाटक प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इस आयोजन में जिला से चार विद्यालयों के चालीस विद्यार्थियों ने भाग लिया और अपने विज्ञान नाटकों का मंचन किया। एस डी माडल स्कूल जगाधरी की टीम ने डाक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम के जीवन को नाटक के माध्यम से मंचित किया।
मुकंद लाल पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने अपने नाटक ‘अथ शापित कथा’ के द्वारा भगवान विष्णु, नारद मुनि और मृत्यु लोक के मानवो के बीच, पृथ्वी पर बढ़ रहे प्रदूषण व ऊर्जा संकट पर संवादों का जीवंत प्रदर्शन किया। 
विष्णु लोक मे मनुष्यों के क्रियाकलापों के प्रति चिंता को व्यक्त किया गया और साथ ही विष्णु भगवान की माया से मनुष्यों को अपनी समस्या से खुद ही लड़ते देख कर खुशी से नारद जी भी नारायण नारायण कह उठे। भगवान विष्णु ने भी गदगद होकर कह ही दिया की मनुष्य इतना सक्षम हो चुका है की अब वो खुद ही अपना संहारक और खुद ही अपना रक्षक बन गया है।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अलाहर के विद्यार्थियों ने अपने नाटक ‘नशा नाश की जड़’ के माध्यम से एक परिवार की कहानी को मंचित किया जिस में उन्होंने दिखाया की किस तरह नशे की लत में उस घर के मुखिया से अपराध हो जाता है वो उसको जेल जाना पड़ता है और वापसी पर वह पाता है की उसका सब कुछ तबाह हो गया है तो वो समाज को नशा करने से रोकने की मुहीम चलाता है।
विवेकानन्द पब्लिक स्कूल हुडा सेक्टर सत्रह जगाधरी के बच्चों ने ‘चंदू की सगाई’ नाटक के द्वारा एक का गाँव चित्रण किया जिस में कूड़ा अधिक होने और गाँव साफ़ सुथरा ना होने के कारण वहां के लड़कों की सगाईयाँ और शादियाँ टूट जाती हैं और कोई भी अपनी लडकी को उस गाँव में नहीं ब्याहना चाहता है।
इस प्रतियोगिता में उपस्थित प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए विद्यालय की प्रधानाचार्या शशि बाठला ने कहा कि नाटक वास्तव में हमारे आसपास का वो जीवन है जिसे हम अभिनय और संवादों के द्वारा खुद जीकर देखते हैं और उनसे खुद प्रेरित होते हैं व समाज को भी अपना प्रेरणा सन्देश पहुंचाते हैं।
जिला विज्ञान विशेषज्ञ डाक्टर विजय त्यागी ने अपने संबोधन में कहा कि विज्ञान नाटक समाज की उन गम्भीर समस्याओं को उठाते हैं 
जिन के बारे में सामन्यतया हर आदमी को नहीं पता होता है और वो उन समस्याओं को दैनिक क्रियाकलाप समझ कर उनकी हानियों को झेलता रहता है।
इस विज्ञान नाटक प्रतियोगिता में मुकन्दलाल पब्लिक स्कूल के नाटक को प्रथम  स्थान मिला। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अलाहर के नाटक को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ। विवेकानन्द पब्लिक स्कूल हुडा सेक्टर सत्रह जगाधरी को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। 
मुकन्दलाल पब्लिक स्कूल के नाटक ‘अथ शापित कथा’ को अगले महीने राज्य स्तर पर भाग लेने के लिए गुडगाँव भेजा जाएगा।
विज्ञान नाटक प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में अजय धीमान प्रवक्ता भौतिकी व उमेश खरबंदा प्रवक्ता रसायन ने भूमिका अदा की जबकि मौके पर गौरव पराशर, ममता वर्मा, दर्शन लाल बवेजा, सुबुही सहगल, धर्मेन्द्र सिंह भी उपस्थित रहे। 

                              


रविवार, 7 जून 2015

पार्थवी के स्कूल में समर कैम्प Summer Camp at Mukand Lal Public school Yamuna Nagar

पार्थवी के स्कूल में समर कैम्प Summer Camp at Mukand Lal Public school Yamuna Nagar 
प्रदर्शनी का अवलोकन करते अभिभावक 
पार्थवी के स्कूल मुकन्द लाल पब्लिक स्कूल सरोजिनी कालोनी यमुनानगर में समर कैम्प (ग्रीष्मकालीन शिविर) का कल समापन हुआ, कईं दिनों से चल रहे इस समर कैम्प में जिले भर से व बाहर के विभिन्न विद्यालयों के बच्चे विभिन्न समूहों में भाग ले रहे थे। पार्थवी का भी ग्रीष्मकालीन शिविर में भाग लेने का यह तीसरा वर्ष था, वह काफी उत्साहित रहती है कि इस समर कैम्प में भाग ले सके। 
प्रदर्शनी में कैम्पर्स के बनाये क्राफ्ट का प्रदर्शन 
इस विद्यालय के समर कैम्प की काफी धूम रहती है और यहाँ विभिन्न गतिविधियों के विशेषज्ञ आमंत्रित किये जाते हैं जो कैम्पर्स को विभिन कलाओं में परांगत करते हैं और इन कलाओं का प्रदर्शन कैम्प के समापन दिवस पर अभिभावकों और मेहमानों के समक्ष करते हैं। इस वर्ष मुझे इस कैम्प का समापन उत्सव में शरीक होने का अवसर मिला तो मैंने पाया की वास्तव में कुछ ही दिनों में बच्चे इस कैम्प के माध्यम से बहुत कुछ सीखे हैं और सबसे बड़ी बात कि इन दिनों बस उन्हें सीखना ही था आनन्दित होना था न की पढ़ाई लिखाई की कोई चिंता करनी थी
प्रधानाचार्या श्रीमती शशी बठला ने संबोधित किया 
विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती शशी बठला, योग्य प्रशिक्षित फेकल्टी मेम्बर्स व कुशल प्रशिक्षण विशेषज्ञों के आपसी तालमेल से एक बेहतरीन ज्ञानवर्धक ग्रीष्मकालीन शिविर का आयोजन सम्पन्न हुआ जिसके लिए सभी आयोजक/प्रबंधक बधाई के पात्र हैं जिन्होंने बच्चो और अभिभावकों का दिल जीत लिया 


आओ जाने कैसे होता है पार्थवी  के स्कूल का समर कैम्प (ग्रीष्मकालीन शिविर)      
समापन समारोह में आये अभिभावक 
कुछ देशों में (आमतौर पर) गर्मियों के महीनों में बच्चों और किशोर-किशोरियों के लिए विशेष निगरानी के अंतर्गत आयोजित किये जाने वाला यह एक कार्यक्रम होता है। समर कैम्प में शामिल होने वालो को कैम्पर्स के नाम से जाना जाता है। छुट्टियों का यह महीना बच्चों के लिए विशेष मायने रखता है। किताबों कापियों के बोझ से थके कंधे कुछ दिनों के लिए मुक्ति की साँस लेते हैं। 
योगा का प्रदर्शन करते हुए कैम्पर्स
अब न उन को सुबह उठने की हाय तौबा और न ही स्कूल जाने की समयबद्ध पाबन्दी होती है। परन्तु दूसरी और उनके माता-पिता ये सोच कर परेशान होते हैं कि इन पूरी छुटि्टयाँ इन बच्चों को कैसे सम्भाला जाय। विभिन्न प्रकार के कम्प्युटर प्रोग्राम, विडियो गेम्सइलेक्ट्रॉनिक मीडिया व आभासी दुनिया के मित्रों की बढ़ती लोकप्रियता के कारण बालक घर की
कोरियोग्राफी का प्रदर्शन करते हुए कैम्पर्स
चार दीवारों में बंध गया है ऐसे में उसे कुछ नया कराने के उद्देश्य से उन्हें आकर्षित करके इन बाउन्ड्रीज से बाहर समर कैम्पों के माध्यम से ही निकाला जा सकता है, पिछली पीढ़ियों की तुलना में आज बच्चों को घर के अंदर ही व्यस्त रखना काफी आसान हो गया है वहां उसे ज्ञानअर्जन तो हो सकता है परन्तु वहां उसमे व्यवहारिक समाजिकता का 
मंगती आंटी नाटक  का प्रदर्शन करते हुए कैम्पर्स

विकास हो पाना सम्भव नहीं है ये कैम्प आपसी तालमेल और सहयोग की भावना विकसित करने का सशक्त माध्यम होते है इन कैम्पों का मुख्य उद्देश्य शैक्षिक व सांस्कृतिक विकास होता है। समर कैम्प के माहौल में बच्चों को एक सुरक्षित व योग्य प्रशिक्षको की निगाहबानी में जोखिम उठाने का अवसर भी मिलता है जो की घर की चारदीवारी में संभव नहीं होता। ये ही वो पूर्वनियोजित कार्यक्रम है जिसे समर कैम्प (ग्रीष्मकालीन शिविर) के नाम से जाना जाता है। 

एरोबिक्स  का प्रदर्शन करते हुए कैम्पर्स
समर कैम्पों में क्ले मोडलिंग, ट्रेकिंग, कोरियोग्राफी, नृत्य, पेपर कटिंग व फोल्डिंग, नाटक मंचन, योगा, एरोबिक्स, क्राफ्ट प्रशिक्षण, व्यक्तित्व विकास, वाचन कला, सिलाई कढ़ाई, गायन, प्रकृति भ्रमण, बेस्ट आउट आफ दी वेस्ट आदि विधाओं/कलाओं में परांगत किया जाता है। 
विभिन्न कलाओं  का प्रदर्शन करते हुए कैम्पर्स
गायन, प्रकृति भ्रमण, बेस्ट आउट आफ दी वेस्ट आदि विधाओं/कलाओं में परांगत किया जाता है। बच्चों को उनकी पसन्द, उनकी हाँबी के अनुसार काम दिया जाता है और उन्हें करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है । कई तरह के कार्यक्रम के द्वारा उनके मानसिक, शारीरिक और बौद्धिक चेतना का विकास किया जाता है। 
पार्थवी ने भी भाग लिया 
उनके पास कई पसन्द के चयन होते हैं जैसे ट्रैकिंग, हाइकिंग, जंगल यात्रा, पर्वतारोहण आदि जिसमें अपनी रुचि के अनुसार बच्चे भाग ले सकते हैं। 
समर कैम्प में बच्चों में मिलजुल कर रहने की प्रवृत्ति, आपसी सदभाव, सहयोग और भाईचारे की भावना का विकास होता है।
अंशवी ने भी भाग लिया 
 

समर कैम्प में भौतिक सुविधाओं की कमी हो सकती है, फिर भी वहाँ बच्चों को वह मिलता है 
जो उन्हें सजे-सजाए घर में नहीं मिलता। 
आजकल एकल परिवार का जमाना है
जिसकी वजह से बच्चों का अस्तित्व सिमटता जा रहा है। 
अभिभावकों ने भी  जम कर विडियोग्राफी की 
मुकन्द लालपब्लिक स्कूल सरोजिनी कालोनी यमुनानगर में आयोजित समर कैम्प (ग्रीष्मकालीन शिविर) उक्त सभी मायनों पर खरा उतरता है मेरा (दर्शन बवेजा) का बहुत मन करता है कि मैं भी किसी गतिविधि या प्रशिक्षण के विशेषज्ञ के रूप में इस आयोजन का हिस्सा बन कर अपने बचपन को फिर से जी सकूं।  
पार्थवी के ब्लॉग के लिए अभिभावक की कलम से ............ 




शनिवार, 17 जनवरी 2015

पार्थवी के जादू भाग -७ Parthvi's magic-7

पार्थवी के जादू भाग -७ Parthvi's magic-7
पार्थवी आप को कभी कभी जादू के रूप में कुछ प्रयोग कर के दिखायेगी
तो इस श्रृंखला का सातवा  जादू प्रस्तुत है
कांच के गिलास के अंदर सारी आक्सीजन जलने में काम आ जाती है तब मोमबत्ती बुझ जाती है 
देखें विडियो