सोमवार, 16 अप्रैल 2012

रुई का पेड़ A cotton tree or tree cotton

रुई का पेड़ A cotton tree or tree cotton
पार्थवी कुछ रोज से कह रही थी पापा जी मेरे स्कूल(MLPS YNR) में रुई का ट्री है मैंने देखा है 
उस पर बड़ी बड़ी रुई लगी है 
मैंने पूछा कितना बड़ा है ?
बहुत बड़ा छत जितना 
मैंने कहा नहीं 
नहीं उस पर बड़ी बड़ी रुई लगी है
मैंने बच्चे की बात को झूठ नहीं माना, 
आज मै पार्थवी के स्कूल मुकंद लाल पब्लिक स्कूल सरोजिनी कालोनी Mukand Lal Public School Sarojini Colony yamunanagar गया 
मैंने देखा वास्तव में जहां वो बता रही थी वहाँ एक कोटन ट्री यानि रुई का पेड़ खड़ा था  
मैंने उस के फोटो लिए रुई के सैम्पल लिए,बीज एकत्र किये 
पार्थवी को रुई के पेड़ से कोई लेना देना नहीं था वो तो इस बात से खुश थी की मैं उस की खोज को देखने स्कूल गया था 
बस उस ने कहा ,
देखा मैंने कहा था ना स्कूल में रुई का पेड़ है है ना
बच्चों में प्रकृती अवलोकन अच्छा शौंक है यह शौंक उन में पैदा किया जाता है मुझे याद है एक बार मैंने एक रिश्तेदार के घर में बगीचे में लगे चीकू के पेड़ को उसे दिखाया था तब से उसे पेड़ को ध्यान से देखने की आदत हो गई है उसने अपने मामा के खेत में आम के पेड़ को आम लगे देख कर पहचान कर हैरान कर दिया था 
खैर... 
आप भी देखें उस रुई के पेड़ के फोटो  
cotton tree Mukand Lal Public School Sarojini Colony yamunanagar  
देखें एक और चित्र
cotton tree Mukand Lal Public School Sarojini Colony yamunanagar  
देखें एक और चित्र
cotton tree Mukand Lal Public School Sarojini Colony yamunanagar  
देखें इसकी रुई और बीज का चित्र
रुई और बीज 
वास्तव में यह पेड़ है क्या आओ जाने इस के बारे में, 
 'कॉटन ट्री'
सेमल (वैज्ञानिक नाम:बॉम्बैक्स सेइबा), इस जीनस के अन्य पादपों की तरह सामान्यतया 'कॉटन ट्री' कहा जाता है। इस उष्णकटिबंधीय वृक्ष का सीधा उर्ध्वाधर तना होता है। इसकी पत्तियां डेशिडुअस होतीं हैं। इसके लाल पुष्प की पाँच पंखुड़ियाँ होतीं हैं। ये वसंत ऋतु के पहले ही आ जातीं हैं।
इसका फल एक कैपसूल जैसा होता है। ये फल पकने पर श्वेत रंग के रेशे, कुछ कुछ कपास की तरह के निकालते हैं। इसके तने पर एक इंच तक के मजबूत कांटे भरे होते हैं। इसकी लकड़ी इमारती काम के उपयुक्त नहीं होती है।  इसके फलों से बेहतरीन रूई मिलती है जिससे मुलायम गद्दे व तकिए बनाए जाते हैं। 
सेमल (बोम्बेक्स सीबा)वृक्ष प्रजाति प्राचीन ऋषियों की आध्यात्मिक साधना में सहायक पंचवटी के पांच वृक्षों में सम्मिलित है इसीलिए इसे देव वृक्ष भी कहा जाता है और इसका उल्लेख महाभारत ग्रन्थ में भी मिलता है। इस वृक्ष के सभी हिस्सों का औषधीय महत्व है जो मधुमेह, हृदयरोग, मूत्रज रोग, नपुंसकता तथा प्रदर रोगों में उपयोग होता है तथा व्यावसायिक रुप से भी इसकी रेशमी रुई (KAPOK), बीज, लकडी आदि उपयोग में लिये जाते है। दलों के झड़ जाने पर डोडा या फल रह जाता है जिसमें बहुत मुलायम और चमकीली रूई या घूए के भीतर बिनौले से बीज बंद रहते हैं। सेमल की रूई को जला कर उसकी राख को शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से आराम आता है।
सेमल की रूई रेशम सी मुलायम और चमकीली होती है और गद्दों तथा तकियों में भरने के काम में आती है, क्योंकि काती नहीं जा सकती।उत्तर बिहार के मैदानी इलाकों में बहुतायत होने होने वाले सेमल की लकड़ी प्लाइवुड निर्माण के लिए सबसे बेहतरीन मानी जाती है। इससे तैयार प्लाइवुड में फंगस लगने की संभावना कम होती है। किसानों के लिए इसके पेड़ बैंक के एफडी की तरह होता है। जब चाहे उन्हे इसकी ऊंची कीमत मिल जाती है। पर्यावरण की दृष्टिकोण से भी सेमल काफी अनुकूल माना जाता है। यह सर्वाधिक आक्सीजन मुक्त करने वाला पेड़ माना जाता है।
भारत ही नहीं दुनिया के सुंदरतम वृक्षों में इसकी गिनती होती है। दक्षिण-पूर्वी एशिया का यह पेड़ ऑस्ट्रेलिया, हाँगकाँग, अफ्रीका और हवाई द्वीप के बाग-बगीचों का एक महत्वपूर्ण सदस्य है। पंद्रह से पैंतीस मीटर की ऊँचाई का यह एक भव्य और तेजी से बढ़ने वाला, घनी पत्तियों का स्वामी, पर्णपाती पेड़ है।
इसके तने पर मोटे तीक्ष्ण काँटों के कारण संस्कृत में इसे 'कंटक द्रुम' नाम मिला है। इसके तने पर जो काँटे हैं वे पेड़ के बड़ा होने पर कम होते जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि युवावस्था में पेड़ को जानवरों से सुरक्षा की जरूरत होती है जबकि बड़ा होने पर यह आवश्यकता खत्म हो जाती है। है न कमाल का प्रबंधन। 
सेमल सुंदर ही नहीं उपयोगी भी है। इसका हर हिस्सा काम आता है। पत्तियाँ चारे के रूप में, पुष्प कलिकाएँ सब्जी की तरह, तने से औषधीय महत्व का गोंद 'मोचरस' निकलता है जिसे गुजरात में कमरकस के रूप में जाना जाता है। लकड़ी नरम होने से खिलौने बनाने व मुख्‍य रूप से माचिस उद्योग में तीलियाँ बनाने के काम आती हैं। रेशमी रूई के बारे में तो आप जान ही गएँ हैं। बीजों से खाद्य तेल निकाला जाता है।
तो कैसा लगा आप को पार्थवी के स्कूल का रुई का पेड़ बताएं जरूर                                     
   

9 टिप्‍पणियां:

Mired Mirage ने कहा…

पार्थवी को यूँ ही प्रकृति प्रति जिज्ञासा रहे और आप उसकी जिज्ञासा में रूचि रखते रहें,
घुघूतीबासूती

"रुनझुन" ने कहा…

बहुत ही रोचक जानकारी... मेरे ननिहाल और ददिहाल दोनों ही जगह घर के सामने सेमल के वृक्ष हैं... मैंने इनसे निकलने वाली रुई को इकठ्ठा करके मम्मी से अपनी Doll के लिए तकिया भी बनवाई है... लेकिन इस पेड़ के बारे में इतनी विस्तृत और रोचक जानकारी मुझे नहीं थी... आज इस पेड़ के बारे में जानकर बहुत ही अच्छा लगा... इतनी सारी रोचक जानकारी हमसे शेयर करने के लिए आपको बहुत-बहुत थैंक्यू अंकल!!!

राज भाटिय़ा ने कहा…

बचपन मे मैने आगरा मे भी इस जैसे पेड को देखा था, जहां बहुत रुई लगती थी, ओर मै बहुत सारी रुई इकट्टी करता था,वैसे तो रुई पोधे पर ही लगती हे,

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…






आदरणीया इंदु अरोड़ा जी
नमस्कार !

बचपन में ऐसी रूई नोटबुक में रखने का आकर्षण रहता था …
याद आ रहा है वह मुलायम स्पर्श !
पार्थवी का आभार कि इतनी रोचक पोस्ट पढ़ने को मिली…
आशीर्वाद गुड़िया को !

हार्दिक शुभकामनाएं !

मंगलकामनाओं सहित…

-राजेन्द्र स्वर्णकार

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 01/06/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

Vijai Mathur ने कहा…

अंतर्राष्ट्रीय बालदिवस पर हार्दिक शुभ कामनाएँ।

सतीश सक्सेना ने कहा…

दुर्लभ जानकारी है ...आभार पार्थवी का !

DINESH PAREEK ने कहा…

आपका भी मेरे ब्लॉग मेरा मन आने के लिए बहुत आभार
आपकी बहुत बेहतरीन व प्रभावपूर्ण रचना...
आपका मैं फालोवर बन गया हूँ आप भी बने मुझे खुशी होगी,......
मेरा एक ब्लॉग है

http://dineshpareek19.blogspot.in/

ePandit ने कहा…

मास्टर जी आपने तो फुटबॉल का मैच और वायुयान की यात्रा के प्रस्ताव वाले चुटकुले वाली बात कर दी।

पार्थवी की बात से प्रसंग शुरु करके फिर विज्ञान पर ले गये। :)