गुरुवार, 5 मई 2011

पार्थवी Parthvi

'सब को मेरी नमस्ते लड्डू पेडे सस्ते'
आज स्कूल से यह सीख कर आई है |
सच में ये बाते स्कूल ही सिखाता आ रहा है दशकों से,
कुछ नहीं बदलता,
बच्चों के मूह से सब सुन कर अपने बचपन के दिन याद आ जाते है|
धन्यवाद पार्थवी

5 टिप्‍पणियां:

डॉ. हरदीप संधु ने कहा…

Sach main bachpan yaad aa gya..
baba ji namste
ladoo pede saste
khane hai to khayo
nahi pado raste !
ha!ha!ha!

KAVITA ने कहा…

badiya prasututi

Kajal Kumar ने कहा…

:)

veerubhai ने कहा…

पंडितजी नमस्ते !हम नहीं समझाते !लड्डू पड़े सस्ते !
ए बी सी डी ई ऍफ़ जी ,
उसमे निकले पंडितजी ,
पंडितजी ने खोदा गढ्ढा ,उसमे निकला गांधी बुढ्ढा,
गांधी बुढ्ढे ने खाए कसेरू ,उसमें निकले जवाहरलाल नेहरु ,
जवाहरलाल नेहरु की आई आवाज़ ,
इन्कलाब !ज़िंदा- बाद

veerubhai ने कहा…

आंधी आई मेह आया !
बड़ी बहु का जेठ आया !
बरसो राम धडाके से ,
बुढ़िया मरजाये फाके से !
पंडितजी पछताओगे ,
वही चने की खाओगे !
यही सब सुनके हम सब बड़े हुएँ हैं ।
मेह -बारिश