सोमवार, 12 जुलाई 2010

गणित की वो समस्याये : जिन्हें कोई हल ना कर सका --१

समस्या न. 1
सन 1745 की बात है गणितज्ञ  गोल्डबेच   Goldbach  
को पता चला कि 2 से आधिक प्रत्येक सम संख्या  को दो आभाज्य संख्या के योग के रूप मे व्यक्त किया जा सकता है | 
Goldbach conjecture
जैसे  :- 
4=3+1
6=3+3
8=5+3
10=5+5
12=7+5
............
............
............
इस के बाद तो लग गए सारे सम संख्याओं का  योग करने मे
20 लाख तक की सम संख्याओं का योग विषम एवं आविभाज्य संख्याओं के योगफल के रूप मे व्यक्त किया जा चुका है
आज तक कोई भी ऐसी सम  संख्या नहीं पता चली है जिसको दो  विषम एवं आविभाज्य संख्याओं के योगफल के रूप मे व्यक्त नहीं किया जा सकता हो |
तो अब सवाल ये है  की आप कब तक बता देंगे ऐसी कोई संख्या ?????
नोट:- उन्मुक्त जी और प्रकाश डालने की कृपा  करे 
  उन्मुक्त ने कहा…
यह (Goldbach's Conjecture) है। यह नम्बर थ्योरी की सबसे पुराने अनुत्तरित प्रश्नों में से है। यह न तो अभी तक सही या गलत सिद्घ हो पाया है।

इसके बारे में एक रोचक पुस्तक Uncle Petros and Goldbach's Conjecture by A Postolos Doxiadis के नाम से है। इसके बारे में जल्द ही साइबर अपराध की श्रंखला में एक चिट्ठी प्रकाशित करूंगा।



7 टिप्‍पणियां:

रंजन ने कहा…

जब कोई हल नहीं कर सका तो हम हाथ नहीं डालते..:)

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

प्रश्न पढ़ लिया है!
--
हल आयेगा तो वे भी पढ़ लेंगे!

अनुनाद सिंह ने कहा…

देखने में कितना सरल है पर सिद्ध करना उतना ही कठिन दीख रहा है। बहुत रोचक !

अनुनाद सिंह ने कहा…

यदि आपका चिट्ठा रोचक और मनोरंजक गणित के हिन्दी चिट्ठे के रूप में उभरता है तो हिन्दीजगत को बहुत लाभ होगा। यदि हो सके तो इसे इस दिशा में ले जाइये।

उन्मुक्त ने कहा…

यह (Goldbach's Conjecture) है। यह नम्बर थ्योरी की सबसे पुराने अनुत्तरित प्रश्नों में से है। यह न तो अभी तक सही या गलत सिद्घ हो पाया है।

इसके बारे में एक रोचक पुस्तक Uncle Petros and Goldbach's Conjecture by A Postolos Doxiadis के नाम से है। इसके बारे में जल्द ही साइबर अपराध की श्रंखला में एक चिट्ठी प्रकाशित करूंगा।

Udan Tashtari ने कहा…

गणित में हाथ शुर से जरा तंग रहा है इसलिए इस पोस्ट पर दृष्टा मात्र माना जाऊँ वरना क्या वजह होती कि इन्जिन्यरिंग छोड़कर सी ए बनता, :)

hempandey ने कहा…

२६५ वर्षों से चली आ रही समस्या का समाधान कोई जीनियस ही कर सकता है.