सोमवार, 31 मई 2010

बेटियाँ


बेटियाँ प्यारी मावां नू
माँ को प्यारी बेटी
बेटी को प्यारी माँ
फिर क्यूँ गवानी पड़े
आजन्मी को जाँ

करो बेटिओं का आदर
व पावो उन से प्यार
पावो उन से छुटकारा
इनसे है घर का श्रृंगार

सही कहा है किसी ने
बेटी नहीं बचावोगे
तो बहु कहा से लावोगे
तो बहु कहा से लावोगे...

2 टिप्‍पणियां:

अन्तर सोहिल ने कहा…

बहुत प्यारी और सुन्दर कविता
एक जनसन्देश देती हुई
आपका आभार यह पढवाने के लिये

प्रणाम

अन्तर सोहिल ने कहा…

बहुत सुन्दर चिट्ठा है आपका॥
आज सारी पोस्ट पढी है।
पहेलियां मजेदार हैं, मगर सभी पर उत्तर आये हुये थे॥
कुछ ऐसा ही एक ब्लॉग मेरी पहेलियां
जो मुझे पसन्द है आप भी देखियेगा, शायद आपको भी अच्छा लगेगा।

प्रणाम स्वीकार करें